
भारत में क्रिप्टोकरेंसी का चलन लगातार बढ़ रहा है, लेकिन इसके साथ ही सरकार ने इस पर टैक्स लगाने के नियम भी सख्त कर दिए हैं। अगर आप बिटकॉइन, एथेरियम या किसी भी क्रिप्टोकरेंसी में निवेश कर रहे हैं या ट्रेडिंग कर रहे हैं, तो यह जानना जरूरी है कि भारत में क्रिप्टो टैक्स कैसे लगता है और उससे कैसे निपटें।
क्रिप्टो टैक्स की शुरुआत
वित्त वर्ष 2022-23 के बजट में भारत सरकार ने पहली बार क्रिप्टोकरेंसी से होने वाली आय पर स्पष्ट टैक्स नियम घोषित किए। इसके अनुसार, क्रिप्टो से होने वाली किसी भी आय पर 30% टैक्स लगाया गया है। यह नियम 1 अप्रैल 2022 से लागू हुआ था और अब तक इसमें कुछ संशोधन किए गए हैं।
2025 में क्रिप्टो टैक्स का ढांचा
- 30% टैक्स दर
अगर आप क्रिप्टो से मुनाफा कमाते हैं — चाहे वह ट्रेडिंग हो, NFT बेचना हो या किसी भी डिजिटल असेट को बेचना — तो उस मुनाफे पर आपको 30% इनकम टैक्स देना होगा।
🔹 कोई डिडक्शन (जैसे खर्चे या लॉस) नहीं मिलेगा, सिर्फ लागत मूल्य घटाया जा सकता है।
🔹 यह टैक्स short-term और long-term दोनों gains पर समान रूप से लागू होता है।
- 1% TDS (Tax Deducted at Source)
1 जुलाई 2022 से सरकार ने 1% TDS लागू किया है। इसका मतलब है कि जब भी आप किसी क्रिप्टो को बेचते हैं और ट्रांजैक्शन ₹50,000 (या कुछ मामलों में ₹10,000) से ऊपर होता है, तो 1% TDS कटेगा।
👉 यह TDS आपके टैक्स रिटर्न में एडजस्ट किया जा सकता है।
- Crypto-to-Crypto ट्रांजैक्शन
अगर आप एक क्रिप्टो को बेचकर दूसरा खरीदते हैं, तब भी यह टैक्स लागू होता है। यानी बिटकॉइन बेचकर एथेरियम खरीदने पर भी मुनाफे पर टैक्स लगेगा।
टैक्स कैसे फाइल करें?
आपको इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरते समय “Capital Gains” सेक्शन में क्रिप्टो से हुई कमाई को दिखाना होगा। यदि आपने ट्रेडिंग की है, तो यह “Business Income” के रूप में भी आ सकता है।
ज़रूरी दस्तावेज़:
हर ट्रांजैक्शन की डिटेल्स
प्रूफ ऑफ इन्वेस्टमेंट (एक्सचेंज स्टेटमेंट्स)
ट्रेडिंग हिस्ट्री और वॉलेट डिटेल्स
भारत सरकार का नजरिया
सरकार ने स्पष्ट किया है कि क्रिप्टो को लीगल टेंडर (सरकारी मान्यता प्राप्त मुद्रा) नहीं माना गया है, लेकिन इस पर टैक्स लगाया जाएगा। इसका मतलब है कि भले ही क्रिप्टो पूरी तरह लीगल नहीं है, लेकिन इससे हुई कमाई सरकार को बताना अनिवार्य है।