
क्रिप्टोकरेंसी मार्केट तेज़ी से बढ़ रहा है और दुनिया भर की सरकारें अब इसके टैक्सेशन और रेगुलेशन को लेकर सख्त हो रही हैं। इसी कड़ी में भारत सरकार ने 1 अप्रैल 2027 से OECD का Crypto-Asset Reporting Framework (CARF) लागू करने की घोषणा की है।
इसका सीधा मतलब है कि अब विदेशों में क्रिप्टो रखने वाले भारतीय नागरिकों को अपने हर ट्रांज़ैक्शन की जानकारी टैक्स अधिकारियों को देनी होगी।
CARF क्या है?
CARF (Crypto-Asset Reporting Framework) एक ग्लोबल टैक्स-ट्रांसपेरेंसी सिस्टम है, जिसे OECD (Organisation for Economic Co-operation and Development) ने 2022 में लॉन्च किया था।
इसका उद्देश्य है कि क्रिप्टोकरेंसी और डिजिटल एसेट्स की रिपोर्टिंग बैंकिंग ट्रांज़ैक्शन की तरह ही हो, ताकि टैक्स चोरी और मनी लॉन्ड्रिंग पर रोक लगाई जा सके।
CARF के तहत देशों के बीच ऑटोमैटिक डेटा एक्सचेंज होगा, यानी अगर कोई भारतीय दुबई, सिंगापुर या अमेरिका के किसी एक्सचेंज पर ट्रेडिंग करता है तो उसकी जानकारी सीधे भारतीय टैक्स विभाग तक पहुँचेगी।
2027 से कौन से देश CARF लागू करेंगे?
OECD की लिस्ट के अनुसार, 52 देश 2027 तक CARF लागू करेंगे। इनमें शामिल हैं:
यूरोप: Austria, Belgium, Bulgaria, Croatia, Cyprus, Czechia, Denmark, Estonia, Finland, France, Germany, Greece, Ireland, Italy, Latvia, Lithuania, Luxembourg, Malta, Netherlands, Poland, Portugal, Romania, Slovak Republic, Slovenia, Spain, Sweden.
अन्य यूरोपीय क्षेत्र: Gibraltar, Guernsey, Iceland, Isle of Man, Jersey, Liechtenstein, Norway, San Marino, Switzerland.
अमेरिका महाद्वीप: Brazil, Canada, Colombia, Mexico.
एशिया-प्रशांत: Indonesia, Israel, Japan, Kazakhstan, Korea, New Zealand.
अन्य: Bermuda, Faroe Islands, South Africa, Uganda, United Kingdom.
2028 से CARF अपनाने वाले देश (15 देश)
इन देशों ने 2028 तक इसे लागू करने की प्रतिबद्धता जताई है:Bahamas, Barbados, British Virgin Islands, Costa Rica, Hong Kong (China), Malaysia, Mongolia, Nigeria, Saint Vincent and the Grenadines, Seychelles, Singapore, Thailand, Türkiye, United Arab Emirates, United States.
CARF में अभी शामिल न हुए “प्रासंगिक” देश (7 देश)
ये देश अभी तक औपचारिक रूप से CARF में शामिल नहीं हुए हैं, लेकिन OECD ने इन्हें “प्रासंगिक” देशों की सूची में रखा है:Argentina, Australia, El Salvador, India, Panama, Philippines, Vietnam.
👉 भारत इस सूची में है लेकिन वित्त मंत्रालय ने पुष्टि की है कि 1 अप्रैल 2027 से भारत CARF लागू करेगा।
भारत के लिए इसका क्या मतलब है?
1. विदेशों में रखे क्रिप्टो की जानकारी छुपाना नामुमकिन होगा।भारतीय निवेशक जो Binance, Bybit, Coinbase या Dubai/Singapore के एक्सचेंज पर ट्रेड करते हैं, उनके ट्रांज़ैक्शन डेटा ऑटोमैटिकली भारत के टैक्स विभाग तक पहुँचेंगे।
2. इनकम टैक्स विभाग के पास ग्लोबल डेटा होगा।अब सिर्फ भारत में रखे क्रिप्टो ही नहीं बल्कि विदेशों में रखे वॉलेट्स और एक्सचेंज की जानकारी भी रिपोर्ट होगी।
3. टैक्स चोरी पर लगाम।जो निवेशक पहले विदेशी एक्सचेंज पर ट्रेडिंग करके टैक्स रिपोर्टिंग से बच जाते थे, अब उनके लिए यह असंभव होगा।
4. Compliance Cost बढ़ेगी।एक्सचेंज और निवेशकों दोनों को KYC, रिपोर्टिंग और टैक्स क्लियर करने में अतिरिक्त खर्च करना पड़ेगा।
ट्रेडर्स और निवेशकों के लिए असर
ट्रांसपेरेंसी: क्रिप्टो अब और ज़्यादा रेगुलेटेड हो जाएगा।
टैक्स क्लैरिटी: सरकार और टैक्स विभाग के नियम और क्लियर हो जाएंगे।
ग्लोबल मैचिंग: भारत में दाखिल किया गया ITR और विदेशी ट्रांज़ैक्शन डेटा मैच कराया जाएगा।
रिस्क: जो लोग अपनी क्रिप्टो इनकम को अभी तक रिपोर्ट नहीं कर रहे थे, उन्हें 2027 के बाद भारी पेनाल्टी और लीगल एक्शन का सामना करना पड़ सकता है।
निष्कर्ष
2027 से शुरू होने वाला CARF एक बड़ा कदम है, जो क्रिप्टो को पूरी तरह ग्लोबल टैक्स नेटवर्क में जोड़ देगा।भारत के निवेशकों के लिए यह एक चेतावनी भी है और एक अवसर भी। चेतावनी इसलिए कि अब कोई भी ट्रांज़ैक्शन छुपाना संभव नहीं होगा, और अवसर इसलिए कि टैक्स क्लैरिटी आने से क्रिप्टो का भविष्य और मज़बूत होगा।
👉 अगर आप भारतीय निवेशक हैं, तो 2027 से पहले ही अपने सभी विदेशी और घरेलू क्रिप्टो लेन-देन को सही तरीके से ITR में रिपोर्ट करना शुरू कर दें।