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भारत अप्रैल 2027 से OECD के ग्लोबल क्रिप्टो टैक्स नेटवर्क से जुड़ेगा – क्रिप्टो निवेशकों और ट्रेडर्स के लिए बड़ा बदलाव

भारत का बड़ा फैसला

भारत सरकार ने पुष्टि की है कि देश अप्रैल 2027 से OECD (Organisation for Economic Co-operation and Development) के Crypto-Asset Reporting Framework (CARF) को लागू करेगा। इसका मतलब है कि अब भारत भी उन देशों की लिस्ट में शामिल हो जाएगा जो क्रिप्टो ट्रांजैक्शन्स की ऑटोमैटिक इंफॉर्मेशन शेयरिंग करते हैं।

OECD का CARF क्या है?

CARF (Crypto-Asset Reporting Framework) OECD द्वारा बनाया गया एक अंतरराष्ट्रीय टैक्स नियम है जिसके तहत सदस्य देश क्रिप्टोकरेंसी, डिजिटल एसेट्स और ब्लॉकचेन से जुड़े सभी वित्तीय लेन-देन की जानकारी आपस में साझा करते हैं।

👉 यह उसी तरह का सिस्टम है जैसा पहले से MCAA (Multilateral Competent Authority Agreement) के तहत बैंक अकाउंट्स और वित्तीय डेटा शेयरिंग के लिए लागू है।

👉 अब इसमें क्रिप्टो एसेट्स को भी शामिल किया जाएगा।

इसका भारतीय निवेशकों और ट्रेडर्स पर क्या असर होगा?

1. ऑफशोर वॉलेट्स और एक्सचेंज अब छिप नहीं सकेंगेबहुत से भारतीय निवेशक टैक्स से बचने के लिए विदेशों के क्रिप्टो एक्सचेंज या वॉलेट्स का इस्तेमाल करते थे। लेकिन 2027 से यह जानकारी भारत सरकार तक अपने आप पहुंच जाएगी।

2. टैक्स चोरी पर रोक लगेगीविदेशी अकाउंट्स और क्रिप्टो होल्डिंग्स को छुपाना अब लगभग असंभव हो जाएगा। सरकार को सीधा डेटा मिलेगा।

3. ट्रेडर्स के लिए पारदर्शिता बढ़ेगीसभी लेन-देन का रिकॉर्ड साफ होगा, जिससे रेगुलेशन और टैक्सेशन क्लियर हो जाएगा।

4. टैक्स भार बढ़ सकता हैसरकार पहले से ही क्रिप्टो पर 30% टैक्स और 1% TDS लागू कर चुकी है। अब विदेशी होल्डिंग्स पर भी यह टैक्स लागू होगा।

भारत के लिए फायदेसरकार को अतिरिक्त टैक्स रेवेन्यू मिलेगा।

क्रिप्टो मनी लॉन्ड्रिंग और ब्लैक मनी रोकने में मदद मिलेगी।

भारत अंतरराष्ट्रीय रेगुलेशन स्टैंडर्ड से जुड़ेगा, जिससे ग्लोबल लेवल पर ट्रस्ट बढ़ेगा।

संभावित चुनौतियाँ👇

भारतीय निवेशकों पर टैक्स का बोझ और बढ़ सकता है।

कई ट्रेडर्स अपना कैपिटल बाहर ले जाने से बचने के लिए मार्केट से निकल सकते हैं।

इससे शॉर्ट-टर्म में क्रिप्टो ट्रेडिंग वॉल्यूम पर असर पड़ सकता है।

एक्सपर्ट्स की राय🔥

क्रिप्टो विशेषज्ञों का कहना है कि भारत का यह कदम लंबे समय में क्रिप्टो इंडस्ट्री के लिए अच्छा साबित होगा क्योंकि इससे रेगुलेशन क्लियर होंगे और इन्वेस्टर्स को कानूनी सुरक्षा मिलेगी। लेकिन ट्रेडर्स को अब अपनी स्ट्रैटेजी बदलनी होगी क्योंकि “टैक्स से बचना” अब लगभग नामुमकिन होगा।

क्रिप्टो एनालिस्ट्स का मानना है कि आने वाले समय में भारत का क्रिप्टो मार्केट और भी रेगुलेटेड और ट्रांसपेरेंट होगा, जिससे विदेशी निवेशक भी अधिक भरोसे के साथ भारतीय एक्सचेंजेस में पैसा लगाएंगे।

✅ निष्कर्ष

भारत का OECD के क्रिप्टो टैक्स नेटवर्क से जुड़ना यह साबित करता है कि सरकार अब क्रिप्टो सेक्टर को पूरी तरह नियंत्रित और पारदर्शी बनाने की दिशा में बढ़ रही है।

👉 2027 के बाद क्रिप्टो निवेशकों के लिए खेल पूरी तरह बदल जाएगा।

👉 विदेशी वॉलेट्स और एक्सचेंज में रखी गई क्रिप्टो भी टैक्स के दायरे में आ जाएगी।

ट्रेडर्स और निवेशकों को अभी से अपनी टैक्स स्ट्रैटेजी और निवेश प्लानिंग पर ध्यान देना चाहिए, क्योंकि आने वाला समय क्रिप्टो के लिए सख्त लेकिन क्लियर होने वाला है।

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