
पिछले कुछ सालों में क्रिप्टोकरेंसी ने पूरी दुनिया की आर्थिक और वित्तीय व्यवस्था को नई दिशा दी है। जहां कई देशों ने इसे सख्ती से बैन या कंट्रोल करने की कोशिश की, वहीं अमेरिका ने इसके लिए अलग रास्ता चुना। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों और उनके बाद बने माहौल ने अमेरिका को “Crypto Capital of the World” बनने का मौका दिया।
आइए समझते हैं कि कैसे ट्रंप ने रेगुलेशन और गवर्नमेंट सपोर्ट के जरिए अमेरिका को ग्लोबल क्रिप्टो हब बनाया।
1. ट्रंप की क्रिप्टो-फ्रेंडली सोच
ट्रंप ने शुरुआती दिनों में क्रिप्टो को लेकर सख्त रुख दिखाया था, लेकिन जैसे-जैसे डिजिटल करेंसी की ताकत और इसकी वैल्यू बढ़ी, उनका दृष्टिकोण बदला।
उन्होंने Web3 और Blockchain Tech को अमेरिका की नेक्स्ट-जनरेशन इकॉनॉमी का हिस्सा बताया।
चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने साफ कहा कि “अमेरिका को क्रिप्टो कैपिटल बनाना ही होगा, वरना चीन और दूसरे देश इस मौके का फायदा उठा लेंगे।”
2. रेगुलेशन में क्लैरिटी
क्रिप्टो मार्केट की सबसे बड़ी समस्या अनिश्चितता (Uncertainty) होती है। निवेशक तभी भरोसा करते हैं जब सरकार साफ और पारदर्शी नियम बनाए।
ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन ने क्रिप्टो टैक्सेशन, AML (Anti-Money Laundering) और Investor Protection पर फ्रेमवर्क बनाया।
SEC (Securities and Exchange Commission) और CFTC (Commodity Futures Trading Commission) को क्लियर गाइडलाइंस दी गईं।
इस रेगुलेटरी क्लैरिटी से अमेरिकी और विदेशी निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ।
3. गवर्नमेंट सपोर्ट और पॉलिटिकल बैकिंग
ट्रंप ने क्रिप्टो को केवल करेंसी नहीं बल्कि नैशनल स्ट्रेंथ का हिस्सा बताया।
व्हाइट हाउस में Crypto Advisory Board की शुरुआत की गई।
Bitcoin ETF जैसी नीतियों को ग्रीन सिग्नल मिला, जिससे वॉल स्ट्रीट और पारंपरिक बैंकिंग सेक्टर ने भी क्रिप्टो को अपनाना शुरू किया।
कई स्टेट्स जैसे टेक्सास और फ्लोरिडा ने क्रिप्टो माइनिंग और ब्लॉकचेन स्टार्टअप्स के लिए टैक्स इंसेंटिव्स दिए।
4. इनोवेशन और स्टार्टअप कल्चर
अमेरिका का सबसे बड़ा फायदा उसका टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम है।
ट्रंप सरकार ने ब्लॉकचेन स्टार्टअप्स के लिए फंडिंग सपोर्ट और कानूनी सुरक्षा दी।
Silicon Valley, Miami और New York को क्रिप्टो और ब्लॉकचेन स्टार्टअप्स का नया हब बनाया गया।
Coinbase, Ripple, Gemini जैसी कंपनियाँ अमेरिका से ही उभरीं और ग्लोबल लेवल पर छा गईं।
5. ग्लोबल डॉमिनेंस की स्ट्रेटेजी
ट्रंप का मानना था कि अगर अमेरिका क्रिप्टो और ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी में लीड नहीं करेगा तो चीन, रूस और UAE जैसे देश इस मौके का फायदा उठाकर ग्लोबल फाइनेंशियल सिस्टम को बदल देंगे।
इसीलिए उन्होंने Crypto को नेशनल पावर स्ट्रक्चर का हिस्सा बनाया और इसे डॉलर की ताकत के साथ जोड़ दिया।
6. अमेरिका क्यों बना “Crypto Capital”?
✅ रेगुलेशन में क्लैरिटी
✅ इनोवेशन फ्रेंडली माहौल
✅ वॉल स्ट्रीट और बैंकों का जुड़ना
✅ गवर्नमेंट का पॉलिटिकल और फाइनेंशियल सपोर्ट
✅ ग्लोबल डॉमिनेंस की स्ट्रेटेजिक पॉलिसी
निष्कर्ष
डोनाल्ड ट्रंप ने क्रिप्टो को सिर्फ डिजिटल करेंसी नहीं बल्कि नेशनल स्ट्रेंथ और फाइनेंशियल फ्यूचर की तरह देखा। यही वजह है कि उनके कार्यकाल और बाद की पॉलिसियों ने अमेरिका को Crypto Capital of the World बना दिया।
आज दुनिया भर के निवेशक और कंपनियाँ अमेरिका को क्रिप्टो हब मानती हैं। आने वाले समय में यह साफ है कि जिसने क्रिप्टो और ब्लॉकचेन को अपनाया, वही फ्यूचर की इकॉनॉमी पर राज करेगा। 🚀