
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 6 अगस्त 2025 को भारत पर एक बड़ा आर्थिक हमला करते हुए अतिरिक्त 25% टैरिफ की घोषणा की, जिससे कुल टैरिफ दर अब 50% हो गई है। यह कदम ऐसे समय पर आया है जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंध मज़बूत माने जा रहे थे, लेकिन रूस से भारत की लगातार कच्चे तेल की खरीद ने ट्रम्प प्रशासन को नाराज़ कर दिया।
भारत सरकार ने इस कदम को “अनुचित” और “अन्यायपूर्ण” बताया है, वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साफ कहा — “हम अपने किसानों, मछुआरों और डेयरी कर्मियों के हितों पर कभी समझौता नहीं करेंगे, चाहे इसकी भारी कीमत क्यों न चुकानी पड़े।”
🧐 ट्रम्प ने यह टैरिफ क्यों लगाया?
1. रूस से तेल खरीद पर दबावट्रम्प का सबसे बड़ा आरोप है कि भारत रूस से डिस्काउंट पर तेल खरीदकर उसे आर्थिक मदद दे रहा है, जबकि अमेरिका रूस पर सख्त प्रतिबंध लागू कर रहा है।
2. ट्रेड बैलेंस सुधारने की रणनीति
ट्रम्प लंबे समय से भारत को “टैरिफ किंग” कहकर आलोचना करते रहे हैं। उनका कहना है कि अमेरिकी उद्योग को बचाने और व्यापार घाटा कम करने के लिए आयात पर ऊंचे टैरिफ जरूरी हैं।
3. राजनीतिक संदेश
यह सिर्फ आर्थिक फैसला नहीं, बल्कि एक राजनीतिक संकेत भी है — कि अमेरिका अपने नियमों के खिलाफ जाने वाले सहयोगियों पर भी सख्त कार्रवाई कर सकता है।
📉 भारत पर संभावित असर
1. निर्यात-आधारित उद्योगों पर चोट
टेक्सटाइल, फुटवियर, ज्वेलरी, ऑटो पार्ट्स, समुद्री उत्पाद पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा।
ऑटो पार्ट्स का $7 बिलियन का कारोबार प्रभावित हो सकता है।ज्वेलरी निर्यातकों ने पहले ही दुबई और मेक्सिको जैसे वैकल्पिक बाजार तलाशने शुरू कर दिए हैं।
2. GDP में गिरावट
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत की GDP वृद्धि दर में 0.6–1.1% तक की गिरावट संभव।
निवेश बैंक Jefferies और Morgan Stanley का अनुमान है कि यह गिरावट 80 basis points तक हो सकती है।
3. रुपया और महंगाई पर दबाव
टैरिफ से निर्यात घटेगा → डॉलर की आमद कम होगी → रुपया कमजोर होगा।
कमजोर रुपया = महंगी आयातित चीज़ें = महंगाई बढ़ने का खतरा।
4. आईटी सेक्टर पर अप्रत्यक्ष असर
अमेरिकी कंपनियां महंगाई और बजट कटौती के चलते IT प्रोजेक्ट्स में कटौती कर सकती हैं।
भारत का IT सेक्टर, जो 50% से ज्यादा राजस्व यूएस से लाता है, दबाव महसूस करेगा।
5. राजनीतिक और रणनीतिक मोर्चा
भारत ने इसे WTO नियमों के खिलाफ बताया है।
QUAD जैसे मंच पर अमेरिका-भारत के रिश्तों में दरार आ सकती है।
भारत रूस, चीन और BRICS देशों के साथ संबंध और मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ा सकता है।
🌏 क्या होंगे भारत के विकल्प?
1. वैकल्पिक बाजार तलाशना — अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और मिडिल ईस्ट में निर्यात बढ़ाना।
2. घरेलू उद्योग को सहारा देना — MSME सेक्टर के लिए टैक्स छूट और सब्सिडी।
3. WTO में शिकायत दर्ज करना — अंतरराष्ट्रीय व्यापार कानून के तहत अमेरिकी टैरिफ को चुनौती देना।
4. राजनयिक बातचीत — अमेरिका के साथ बैकचैनल डायलॉग जारी रखना।
📢 निष्कर्ष
ट्रम्प का यह टैरिफ फैसला भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों के लिए एक बड़ा झटका है। अल्पकाल में यह निर्यात, GDP और निवेश पर नकारात्मक असर डालेगा, लेकिन लंबी अवधि में यह भारत को वैकल्पिक बाजारों और रणनीतिक गठबंधनों की ओर धकेल सकता है।
भारत को अब संतुलन साधते हुए अपने आर्थिक हितों और राजनीतिक स्वतंत्रता दोनों की रक्षा करनी होगी।
✍ आपकी राय क्या है?क्या भारत को अमेरिका के दबाव में आकर रूस से तेल खरीद कम करनी चाहिए, या फिर अपने हित में मौजूदा नीति पर डटे रहना चाहिए?कमेंट सेक्शन में बताएं।